अति-संसाधित खाद्य पदार्थों (UPFs) का जलवायु प्रभाव वैश्विक खाद्य प्रणालियों की स्थिरता के लिए एक बढ़ती हुई चिंता का विषय है, खासकर जब वैश्विक उत्तर और दक्षिण के बीच उपभोग पैटर्न और उत्पादन पद्धतियों की तुलना की जाती है। इस विश्लेषण से पता चलता है कि यूपीएफ का उत्पादन और उपभोग ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिसमें विकसित देशों में इसका प्रभाव अधिक स्पष्ट होता है, जबकि विकासशील देशों में भी यह तेजी से बढ़ रहा है।
खाद्य प्रणालियों से उत्सर्जन में अति-संसाधित खाद्य पदार्थों का क्या योगदान है?
अति-संसाधित खाद्य पदार्थों का उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन और अपशिष्ट निपटान खाद्य प्रणालियों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में एक बड़ा हिस्सा है। इन खाद्य पदार्थों के निर्माण में अक्सर ऊर्जा-गहन औद्योगिक प्रक्रियाएं शामिल होती हैं, जिसमें जीवाश्म ईंधन का उपयोग होता है (जर्नल ऑफ क्लीनर प्रोडक्शन, 2021)। इसके अतिरिक्त, लंबी और जटिल आपूर्ति श्रृंखलाएं, जो कच्चे माल को दुनिया भर से एकत्र करती हैं और तैयार उत्पादों को वितरित करती हैं, परिवहन से जुड़े उत्सर्जन को बढ़ाती हैं। उदाहरण के लिए, ब्राजील में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि यूपीएफ के उत्पादन से कम संसाधित खाद्य पदार्थों की तुलना में प्रति किलोग्राम औसतन 55% अधिक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है (द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ, 2021)।
वैश्विक उत्तर बनाम दक्षिण: उपभोग और उत्सर्जन पैटर्न में क्या अंतर है?
अति-संसाधित खाद्य पदार्थों का जलवायु प्रभाव वैश्विक उत्तर और दक्षिण के देशों के बीच उपभोग पैटर्न में महत्वपूर्ण भिन्नताओं के कारण भिन्न होता है। ऐतिहासिक रूप से, उत्तरी अमेरिका और यूरोप जैसे वैश्विक उत्तर के देशों में यूपीएफ की खपत अधिक रही है, जो अत्यधिक औद्योगिक खाद्य प्रणालियों और उपभोक्ता-उन्मुख समाजों की विशेषता है। इन क्षेत्रों में, यूपीएफ आहार का 50% से अधिक हिस्सा बना सकते हैं (ब्रिटिश मेडिकल जर्नल, 2020)। इसके विपरीत, वैश्विक दक्षिण के कई देशों में पारंपरिक रूप से ताजे, स्थानीय और न्यूनतम संसाधित खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन किया जाता रहा है। हालाँकि, शहरीकरण और पश्चिमीकरण के साथ, वैश्विक दक्षिण में भी यूपीएफ की खपत तेजी से बढ़ रही है, जिससे पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है। (डब्ल्यूएचओ, 2022)।

| क्षेत्र | औसत यूपीएफ खपत (किलो/व्यक्ति/वर्ष) | प्रति व्यक्ति CO2 उत्सर्जन (किग्रा CO2e/वर्ष) |
|---|---|---|
| उत्तरी अमेरिका | 180-220 | 450-600 |
| यूरोप | 150-190 | 380-500 |
| लैटिन अमेरिका | 80-120 | 200-320 |
| एशिया | 40-80 | 100-250 |
| अफ्रीका | 20-50 | 50-150 |
उत्पादन पद्धतियाँ: गहन कृषि और संसाधन दोहन
यूपीएफ का उत्पादन अक्सर गहन कृषि पद्धतियों पर निर्भर करता है, विशेष रूप से सोया, मक्का और ताड़ के तेल जैसी मोनोक्रॉपिंग फसलों के लिए जो इन खाद्य पदार्थों के मुख्य तत्व हैं। इन पद्धतियों के लिए बड़े पैमाने पर भूमि समाशोधन की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप वनों की कटाई, जैव विविधता का नुकसान और मृदा का क्षरण होता है (साइंस एडवांसेज, 2019)। इसके अतिरिक्त, सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों का भारी उपयोग नाइट्रस ऑक्साइड जैसे शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करता है। पानी का अत्यधिक उपयोग और ऊर्जा-गहन प्रसंस्करण संयंत्र भी यूपीएफ के पर्यावरणीय पदचिह्न को बढ़ाते हैं। वैश्विक दक्षिण में, इन फसलों की खेती अक्सर वन क्षेत्रों के अतिक्रमण और स्थानीय समुदायों के विस्थापन का कारण बनती है, जिससे सामाजिक और पर्यावरणीय अन्याय बढ़ता है।
““अति-संसाधित खाद्य पदार्थों का जलवायु प्रभाव सिर्फ उत्सर्जन तक सीमित नहीं है; यह हमारे ग्रह के पारिस्थितिकी तंत्रों के व्यापक परिवर्तन और संसाधनों के असमान वितरण को दर्शाता है।””
पैकेजिंग और अपशिष्ट: एक सतत पर्यावरणीय बोझ
अति-संसाधित खाद्य पदार्थ लगभग हमेशा बहु-परत प्लास्टिक पैकेजिंग में आते हैं, जो उत्पादन से लेकर निपटान तक एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय बोझ पैदा करता है। प्लास्टिक का उत्पादन जीवाश्म ईंधन से होता है, जिसके परिणामस्वरूप भारी उत्सर्जन होता है। इसके अलावा, इस पैकेजिंग का एक बड़ा हिस्सा लैंडफिल में समाप्त होता है, जहां यह सैकड़ों वर्षों तक बना रहता है, या महासागरों में प्रवेश करता है, जिससे समुद्री जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान होता है (एलेन मैकआर्थर फाउंडेशन, 2016)। यूपीएफ के साथ जुड़ा खाद्य अपशिष्ट भी एक गंभीर समस्या है, क्योंकि उत्पाद अक्सर कम शैल्फ-जीवन वाले होते हैं या बड़ी मात्रा में बेचे जाते हैं जो पूरी तरह से उपभोग नहीं होते हैं। ये अपशिष्ट, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण में अपर्याप्त अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों वाले क्षेत्रों में, मीथेन जैसे शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं जब वे लैंडफिल में विघटित होते हैं।
खाद्य प्रकार द्वारा अनुमानित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन intensity (kg CO2e प्रति kg खाद्य उत्पाद)
आगे क्या देखें: जलवायु न्याय और खाद्य प्रणालियों का भविष्य?
अति-संसाधित खाद्य पदार्थों के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के आलोक में, जलवायु न्याय एक महत्वपूर्ण विचार बन जाता है। वैश्विक उत्तर, जिसने ऐतिहासिक रूप से यूपीएफ की खपत और संबंधित उत्सर्जन में सबसे अधिक योगदान दिया है, पर इन प्रणालियों को बदलने का अधिक दायित्व है। इसमें स्थायी कृषि पद्धतियों का समर्थन करना, स्थानीय और पौधे-आधारित आहार को बढ़ावा देना, और खाद्य अपशिष्ट को कम करना शामिल है। वैश्विक दक्षिण में, नीति निर्माताओं को यूपीएफ के तेजी से प्रसार को रोकने के लिए रणनीति विकसित करनी चाहिए, जिसमें स्वस्थ खाद्य विकल्पों तक पहुंच में सुधार और स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मजबूत करना शामिल है। भविष्य में, खाद्य प्रणालियों के डीकार्बोनाइजेशन और अधिक न्यायसंगत और पर्यावरण-अनुकूल खाद्य वातावरण बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नीतिगत हस्तक्षेप महत्वपूर्ण होंगे (आईपीसीसी, 2022)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अति-संसाधित खाद्य पदार्थों का जलवायु परिवर्तन पर क्या प्रभाव पड़ता है?+
अति-संसाधित खाद्य पदार्थ जलवायु परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं क्योंकि उनके उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन और अपशिष्ट निपटान में ग्रीनहाउस गैसों का भारी उत्सर्जन होता है। ऊर्जा-गहन औद्योगिक प्रक्रियाएं, प्लास्टिक पैकेजिंग, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं मिलकर इनके कार्बन पदचिह्न को बढ़ाती हैं।
वैश्विक उत्तर और दक्षिण में अति-संसाधित खाद्य पदार्थों की खपत में क्या अंतर है?+
ऐतिहासिक रूप से, वैश्विक उत्तर में अति-संसाधित खाद्य पदार्थों की खपत बहुत अधिक रही है, जो उनके आहार का एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं। हालांकि, शहरीकरण और आर्थिक विकास के कारण वैश्विक दक्षिण में भी इनकी खपत तेजी से बढ़ रही है, जिससे इन क्षेत्रों में भी पर्यावरणीय दबाव बढ़ रहा है।
क्या पौधे-आधारित अति-संसाधित खाद्य पदार्थ पर्यावरण के लिए बेहतर हैं?+
पौधे-आधारित अति-संसाधित खाद्य पदार्थों का कार्बन पदचिह्न आमतौर पर पशु-आधारित यूपीएफ की तुलना में कम होता है। हालांकि, वे अभी भी अपनी प्रसंस्करण, पैकेजिंग और लंबी आपूर्ति श्रृंखलाओं के कारण पर्यावरण पर प्रभाव डालते हैं। सबसे टिकाऊ विकल्प न्यूनतम संसाधित पौधे-आधारित खाद्य पदार्थ हैं।
सरकारें अति-संसाधित खाद्य पदार्थों के जलवायु प्रभाव को कैसे कम कर सकती हैं?+
सरकारें स्थायी कृषि को बढ़ावा देकर, स्थानीय खाद्य प्रणालियों का समर्थन करके, यूपीएफ पर कर लगाकर, स्वस्थ और ताजे खाद्य पदार्थों तक पहुंच में सुधार करके, और प्लास्टिक पैकेजिंग पर प्रतिबंध या कर लगाकर अति-संसाधित खाद्य पदार्थों के जलवायु प्रभाव को कम कर सकती हैं।
एक उपभोक्ता के रूप में मैं अति-संसाधित खाद्य पदार्थों के पर्यावरणीय पदचिह्न को कैसे कम कर सकता हूँ?+
एक उपभोक्ता के रूप में, आप ताजे, स्थानीय और न्यूनतम संसाधित खाद्य पदार्थों को चुनकर, घर पर खाना बनाकर, प्लास्टिक पैकेजिंग वाले उत्पादों से बचकर, और खाद्य अपशिष्ट को कम करके अति-संसाधित खाद्य पदार्थों के पर्यावरणीय पदचिह्न को काफी कम कर सकते हैं। पौधे-आधारित आहार अपनाना भी इसमें मदद करता है।









